एनल फिशर क्यों होता है और इसका इलाज कैसे करें
मल त्याग के समय तेज़ जलन और खून — यह सुनकर कोई भी घबरा सकता है। लेकिन यह ज़्यादातर मामलों में एनल फिशर की निशानी होती है, जो एक आम और पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। अगर आप भी इस तकलीफ से गुज़र रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए लिखा गया है।
एनल फिशर क्या होता है?
एनल फिशर (Anal Fissure) यानी गुदा (Anus) की अंदरूनी त्वचा में एक छोटी-सी दरार या कट। यह दरार इतनी दर्दनाक हो सकती है कि कई लोग पूरे दिन बेचैनी महसूस करते हैं। यह पाइल्स (बवासीर) से अलग होता है, लेकिन दोनों के लक्षण कभी-कभी एक जैसे लग सकते हैं।
फिशर दो प्रकार के होते हैं:
- एक्यूट (Acute) फिशर — नया फिशर जो कुछ हफ्तों में ठीक हो सकता है
- क्रोनिक (Chronic) फिशर — पुराना फिशर जो बार-बार होता है और जिसमें विशेष इलाज ज़रूरी होता है
एनल फिशर के मुख्य कारण
1. कब्ज और कठोर मल
यह सबसे बड़ा कारण है। जब मल बहुत कठोर और मोटा हो जाता है, तो वह गुदा की पतली त्वचा को फाड़ देता है। भारत में खान-पान की आदतों की वजह से कब्ज बहुत आम है।
2. लंबे समय तक दस्त
बार-बार पतले दस्त भी गुदा की त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं।
3. प्रसव (Childbirth)
महिलाओं में प्रसव के दौरान या बाद में भी फिशर हो सकता है।
4. पर्याप्त पानी न पीना
शरीर में पानी की कमी से मल कठोर होता है और फिशर का खतरा बढ़ता है।
5. अत्यधिक जोर लगाना
मल त्याग के समय अनावश्यक ज़ोर लगाना गुदा की नसों और त्वचा दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इससे भगन्दर (फिस्टुला) भी हो सकता है।
एनल फिशर के लक्षण
इन संकेतों को पहचानें:
- तीव्र दर्द — मल त्याग के दौरान और बाद में जलन जैसा दर्द जो 30–60 मिनट तक रह सकता है
- ताज़ा लाल खून — टॉयलेट पेपर पर या मल के ऊपर (यह बवासीर में खून जैसा ही दिखता है)
- गुदा में खुजली या जलन
- मल त्याग से डर — दर्द के कारण कई लोग मल रोकने लगते हैं, जिससे कब्ज और बढ़ती है
- गुदा के पास छोटी सूजन — पुराने फिशर में एक छोटी गाँठ बन सकती है (Sentinel Tag)
एनल फिशर का इलाज कैसे होता है?
घरेलू और जीवनशैली उपाय (हल्के फिशर के लिए)
सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath): गुनगुने पानी में 10–15 मिनट बैठना — यह सबसे सरल और असरदार उपाय है। इससे दर्द कम होता है और रक्त प्रवाह बेहतर होता है।
फाइबर युक्त खाना: इसबगोल की भूसी, दलिया, पपीता, केला — ये मल को नरम रखते हैं।
खूब पानी पियें: दिन में 8–10 गिलास पानी ज़रूरी है।
तेल-मसाले कम करें: मिर्च, तला हुआ खाना और जंक फूड से परहेज़ रखें।
दवाइयाँ (Medications)
डॉक्टर की सलाह से:
- क्रीम और ऑइंटमेंट — नाइट्रोग्लिसरिन या कैल्शियम चैनल ब्लॉकर क्रीम जो गुदा की मांसपेशियों को आराम देती हैं
- स्टूल सॉफ्नर — मल नरम करने की दवाएं
क्षार कर्म (Kshar Karma) — आयुर्वेदिक उपचार
बिजनौर पाइल्स सेंटर में क्षार कर्म एक दर्दरहित आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमें औषधीय लेप से फिशर को ठीक किया जाता है। यह बिना चीरे के, बिना टाँके के होती है।
सर्जरी — कब ज़रूरी होती है?
पुराने (Chronic) फिशर में जब बाकी इलाज काम नहीं करते, तब Lateral Internal Sphincterotomy (LIS) की जाती है। यह एक छोटी-सी प्रक्रिया है जो दिन में ही (Day-Care) हो जाती है।
फिशर से बचाव के लिए डाइट टिप्स
| खाएं ✅ | न खाएं ❌ |
|---|---|
| दलिया, ओट्स | मैदा, बिस्किट |
| पपीता, केला | मिर्च-मसाले |
| हरी सब्ज़ियाँ | जंक फूड |
| इसबगोल | कैफीन अधिक मात्रा में |
| 8–10 गिलास पानी | कोल्ड ड्रिंक |
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
इन स्थितियों में तुरंत विशेषज्ञ से मिलें:
- दर्द 1 हफ्ते से ज़्यादा बना हो
- खून बंद न हो रहा हो
- मल त्याग करना लगभग असंभव हो जाए
- बुखार या गुदा के पास सूजन-पस हो (यह भगन्दर भी हो सकता है)
देरी न करें — पुराना फिशर ठीक होने में बहुत ज़्यादा समय लेता है और जटिल इलाज की ज़रूरत पड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या एनल फिशर बिना ऑपरेशन के ठीक हो सकता है?
हाँ। नए फिशर अक्सर खान-पान सुधार, सिट्ज़ बाथ और दवाओं से 4–6 हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। पुराने फिशर में आयुर्वेदिक या सर्जिकल प्रक्रिया लग सकती है।
फिशर और बवासीर में क्या फर्क है?
बवासीर (Piles) में नसें फूल जाती हैं, जबकि फिशर में त्वचा में दरार पड़ती है। दोनों में खून आ सकता है लेकिन फिशर में दर्द बहुत ज़्यादा होता है।
क्या बच्चों को भी फिशर हो सकता है?
हाँ, बच्चों में कब्ज की वजह से फिशर काफी आम है। घबराएँ नहीं — बच्चों में यह जल्दी ठीक भी होता है।
निष्कर्ष
एनल फिशर तकलीफदेह ज़रूर है, लेकिन यह पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। सही समय पर सही इलाज से आप पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। शर्म या डर की वजह से देरी मत करें।
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